खाने को आधा, पानी को दूना, कसरत को तीन गुणा और हंसने को चौगुना करो ।

Saturday, March 19, 2011

Rajiv dixit ayurveda

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हमारा गीता आधारित १८ सूत्रीय युग निर्माण सत्संकल्प

-:हमारा गीता आधारित १८ सूत्रीय युग निर्माण सत्संकल्प :-

१-हम ईश्वर को सर्वव्यापी और न्यायेकारी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतरेंगे.
२-शरीर को भगवन का मंदिर समझ कर आत्मसयम और नियेमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करंगे.
३-मन को कुविचारों और दुर्भाव्नाओ से बचाए रखने के लिए स्वाध्याये तथा सत्संग की व्यवस्था रखे रहेंगे.
४-इन्द्रिये सयम, अर्थ सयम, समय सयम और विचार सयम का सतत अभ्यास करेंगे.
५-अपने को समाज का एक अभिन्न अंग मानेगे और सबके हित में अपना हित समझेंगे.
६-मर्यादाओ को पालेंगे, वर्जनाओ से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिस्ट बने रहेंगे.
७-समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को जीवन का एक अविछिन्न अंग मानेगे.
८-चारो ओर मधुरता, स्वछता, सादगी एवं सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे.
९-अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्ये करेंगे.
१०-मनुष्ये के मूल्यांकन की कसोटी उसकी सफलताओ, योग्यताओ एवं विभूतियो को नहीं, उसके सद्विचारों और सत्कर्मो को मानेगे.
११-दुसरो के साथ वह व्यव्हार नहीं करेंगे, जो हमे अपने लिए पसंद नहीं.
१२-नर नारी के प्रति पवित्र द्रष्टि रखेंगे.
१३-संसार में सत्प्रव्र्तियो के पुण्ये प्रसार के लिए अपने समय, प्रभाव, ज्ञान, पुरुषार्थ एवं धन का एक अंश नियेमित रूप से लगाते रहेंगे.
१४-परम्पराओ की तुलना में विवेक को महत्व देंगे.
१५-सज्जनों को संघटित करने, अनीति से लोहा लेने और नवसर्जन की गतिविधियो मैं पूरी रूचि लेंगे.
१६-राष्ट्रिये एकता एवं समता के प्रति निष्टावान रहेंगे. जाती, लिंग, भाषा, सम्प्रदाय आदि के आधार पर कोई भेदभाव न बरतेंगे.
१७-मनुष्ये अपने भाग्ये का निर्माता आप है -इस आधार पर हमारी मन्येता है की हम उत्कृष्ट बनेंगे और दूसरो को श्रेष्ठ बनाएंगे, तो युग अवश्य बदलेगा.
१८-हम बदलेंगे युग बदलेगा इस तथ्य पर हमारा परिपूर्ण विश्वास है. .